अजनबी की परछाईं
रात के 11 बज रहे थे।
बारिश थम चुकी थी, लेकिन सड़कें अब भी गीली थीं।
शहर की हवा में एक अजीब-सी ठंडक थी—जैसे मौसम नहीं, किस्मत बदल रही हो।
आरव अपनी बाइक पर धीरे-धीरे चल रहा था।
पीछे मीरा बैठी थी।
आज पहली बार मीरा की चुप्पी भारी लग रही थी।
वो बोल नहीं रही थी… लेकिन उसकी सांसें बता रही थीं कि उसके अंदर कुछ टूट रहा है।
आरव ने हल्की आवाज़ में पूछा,
“मीरा… सब ठीक है?”
मीरा ने जवाब नहीं दिया।
बस अपनी उंगलियों से आरव की जैकेट को थोड़ा कसकर पकड़ लिया।
दिल की बेचैनी
आरव ने बाइक रोकी।
पास ही एक छोटा-सा चाय का स्टॉल था।
लाइट पीली थी, और आसपास दो-चार लोग ही थे।
मीरा नीचे उतरी।
उसकी आंखें लाल थीं, जैसे वो बहुत देर से रोना रोक रही हो।
आरव ने दो चाय मंगवाई और धीरे से कहा,
“मीरा… अगर कुछ कहना है तो कह दो।
मैं सुन रहा हूँ।”
मीरा ने नजरें झुका लीं।
कुछ पल बाद उसने धीरे से कहा,
“आरव… क्या तुम्हें कभी ऐसा लगा है कि तुम किसी से प्यार तो करते हो…
लेकिन तुम उसे अपना नहीं बना सकते?”
आरव का दिल धड़क उठा।
उसने मीरा की तरफ देखा।
“क्यों नहीं बना सकते?”
मीरा की आंखों में पानी भर आया।
“क्योंकि… कुछ रिश्ते अधूरे ही रह जाते हैं।”
प्यार का डर
आरव ने मीरा का हाथ पकड़ लिया।
“मीरा… मैं नहीं चाहता कि तुम खुद को अकेला समझो।
मैं हूँ।”
मीरा ने हाथ पीछे कर लिया।
“आरव… तुम नहीं समझते,”
मीरा ने कांपती आवाज़ में कहा,
“मैं जिस दुनिया से आती हूँ…
वहाँ प्यार की कीमत बहुत बड़ी होती है।”
आरव चौंका।
“तुम किस दुनिया से आती हो?”
मीरा ने जवाब नहीं दिया।
बस चाय का कप पकड़कर दूसरी तरफ देखने लगी।
और तभी…
एक अजनबी की नजर
मीरा की नजर सड़क के उस पार गई।
एक आदमी…
काले कपड़ों में…
चेहरा आधा ढका हुआ…
दूर खड़ा था।
वो आदमी मीरा को देख रहा था।
जैसे वो मीरा को बहुत अच्छे से जानता हो।
मीरा का चेहरा सफेद पड़ गया।
उसके हाथ से कप लगभग गिरने ही वाला था।
“आरव…”
मीरा ने धीमे स्वर में कहा,
“वो… वो आदमी…”
आरव ने पीछे मुड़कर देखा।
लेकिन वो आदमी…
अचानक पीछे मुड़कर भीड़ में गायब हो गया।
पुराना डर वापस
मीरा कांप रही थी।
“तुम डर क्यों रही हो?”
आरव ने पूछा।
मीरा ने रोते हुए कहा,
“आरव… वो मुझे ढूंढ रहे हैं।”
आरव सन्न रह गया।
“कौन?”
मीरा ने धीरे से कहा,
“मेरे अपने…”
घर का रास्ता
आरव ने बिना कुछ पूछे मीरा को बाइक पर बैठाया।
और बाइक तेज़ कर दी।
रास्ते में मीरा बार-बार पीछे देख रही थी।
आरव ने भी महसूस किया—
आज की हवा अलग है।
आज…
शहर में कोई पीछा कर रहा था।
पीछा
एक बाइक पीछे से आई।
पहले दूर थी।
फिर पास।
फिर बहुत पास।
मीरा ने आरव की कमर पकड़ ली।
“आरव… वो हमारे पीछे है…”
आरव ने बाइक की स्पीड बढ़ा दी।
लेकिन वो बाइक भी तेज़ हो गई।
और फिर…
सामने से एक कार आकर रुकी।
कार का दरवाज़ा खुला।
दो आदमी उतरे।
खतरे का पहला चेहरा
आरव ने बाइक रोकी।
मीरा का हाथ पकड़कर उसे पीछे किया।
“मीरा… पीछे रहो।”
एक आदमी आगे आया।
“मीरा मैडम…”
उसने मुस्कुराकर कहा,
“बहुत भाग लिया।”
मीरा की आंखों में डर था।
“मैं… मैं किसी के साथ नहीं जाऊंगी,”
मीरा ने कांपते हुए कहा।
दूसरा आदमी बोला,
“ये फैसला आपका नहीं है।”
आरव का गुस्सा
आरव ने आगे बढ़कर कहा,
“वो कहीं नहीं जाएगी।
आप लोग कौन हैं?”
पहला आदमी हँसा।
“हम कौन हैं…
ये जानना तुम्हारे लिए जरूरी नहीं है, लड़के।”
आरव ने गुस्से में उसका कॉलर पकड़ लिया।
“मीरा को हाथ लगाया…
तो मैं…”
उस आदमी ने आरव को धक्का दिया।
और तभी…
पीछे से किसी ने डंडा मारा।
आरव लड़खड़ा गया।
मीरा चीख पड़ी।
मीरा को उठाने की कोशिश
वो लोग मीरा की तरफ बढ़े।
मीरा पीछे हटने लगी।
“नहीं… नहीं… मुझे छोड़ दो!”
लेकिन एक आदमी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
मीरा रोने लगी।
“आरव…!”
आरव का टूटना
आरव ने खुद को संभाला।
और मीरा की तरफ दौड़ा।
उसने उस आदमी को जोर से मारा।
मीरा उसके पीछे छिप गई।
आरव की आंखों में आग थी।
“मीरा मेरी जिम्मेदारी है,”
आरव ने कहा।
तभी दूर से एक आवाज़ आई—
“आरव… हट जाओ।”
कहानी में नया मोड़
एक कार तेज़ी से आई।
और उसके अंदर से एक आदमी उतरा।
सूट-बूट में।
चेहरा गंभीर।
उसने आते ही उन गुंडों को देखा।
“तुम लोग… वापस जाओ,”
उसने सख्त आवाज़ में कहा।
पहला आदमी चौंका।
“सर… लेकिन…”
सूट वाला आदमी और सख्त हो गया।
“मैंने कहा— वापस जाओ।”
गुंडे पीछे हट गए।
और कुछ ही सेकंड में…
सब गायब।
मीरा का शरीर कांप रहा था।
आरव ने पूछा,
“आप कौन हैं?”
अजनबी का नाम
वो आदमी मीरा की तरफ देखता है।
और धीरे से कहता है—
“मीरा… घर चलो।
अब बहुत हो गया।”
मीरा की आंखों में आंसू आ गए।
“आप…”
मीरा की आवाज़ टूट गई।
“आप यहाँ कैसे?”
अजनबी ने कहा—
“मैं तुम्हें लेने आया हूँ।”
मीरा का सच (आधा)
आरव ने मीरा की तरफ देखा।
“मीरा… ये कौन है?”
मीरा ने धीरे से कहा—
“ये… मेरे पापा के सबसे करीबी आदमी हैं।”
आरव चौंक गया।
“तुम्हारे पापा?”
मीरा ने आंखें झुका लीं।
“आरव… मैं तुम्हें सब नहीं बता सकती।
लेकिन मैं… मैं बहुत बड़ी मुसीबत में हूँ।”
आरव का फैसला
आरव ने मीरा का हाथ पकड़ लिया।
“तुम मुसीबत में हो…
तो मैं भी हूँ।”
मीरा ने रोते हुए कहा,
“आरव… तुम समझ नहीं रहे।
ये लोग…
तुम्हें भी मार सकते हैं।”
आरव ने मुस्कुराकर कहा—
“अगर प्यार अधूरा है…
तो मैं उसे पूरा करने की कोशिश करूंगा।”
अंतिम सीन
सूट वाला आदमी आरव को देखता है।
उसकी आंखों में चेतावनी थी।
“लड़के…
मीरा तुम्हारे लिए नहीं है।”
आरव ने जवाब दिया—
“मीरा किसी के लिए नहीं है।
वो इंसान है।
और वो खुद फैसला करेगी।”
मीरा दोनों के बीच खड़ी थी।
आंसुओं में डूबी।
और तभी…
मीरा का फोन बजा।
स्क्रीन पर लिखा था—
“DAD”
मीरा कांप गई।
उसने कॉल उठाया।
दूसरी तरफ से सिर्फ दो शब्द आए—
“घर वापस आ जाओ।”
मीरा की आंखों से आंसू गिर गए।
और कैमरा आरव के चेहरे पर जाता है।
उसकी आंखों में दर्द था।
लेकिन साथ में जिद भी—
“मैं उसे जाने नहीं दूँगा।”
