“पहली मुलाकात”
शाम का वक्त था। आसमान में हल्के बादल छाए हुए थे और हवा में हल्की सी ठंडक घुली हुई थी। शहर की भीड़-भाड़ से दूर एक छोटा सा कैफे अपनी शांति के लिए जाना जाता था। उसी कैफे के कोने वाली मेज पर आरव बैठा था, हाथ में कॉफी का कप और सामने खुली डायरी।
आरव एक लेखक था। शब्दों से अपनी दुनिया बनाने वाला इंसान। उसके चेहरे पर हमेशा एक अजीब सी उदासी रहती थी, जैसे कोई कहानी अधूरी रह गई हो। वह अक्सर इस कैफे में आकर अपनी कहानियाँ लिखा करता था, क्योंकि यहाँ उसे सुकून मिलता था।
आज भी वह अपनी नई कहानी की शुरुआत लिखने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मन कहीं और भटका हुआ था।
उसी वक्त कैफे का दरवाज़ा खुला।
हल्की सी घंटी बजी और हवा के साथ एक खुशबू अंदर आई।
आरव ने अनजाने में सिर उठाकर देखा।
और फिर उसकी नज़र उसी पर ठहर गई।
सफेद कुर्ता, नीली जींस, खुले बाल और आँखों में गहरी उदासी छुपाए एक लड़की धीरे-धीरे अंदर आई। उसने चारों तरफ देखा और फिर खिड़की के पास वाली मेज पर बैठ गई।
उसका नाम मीरा था।
हालाँकि आरव यह नाम उस पल नहीं जानता था, लेकिन उसकी आँखों में कुछ ऐसा था जिसने आरव को अंदर तक हिला दिया।
मीरा ने अपना बैग कुर्सी पर रखा और मेन्यू देखने लगी। उसकी उंगलियाँ हल्के से काँप रही थीं। जैसे वह किसी डर से भागकर आई हो।
आरव की नज़र बार-बार उसकी तरफ चली जाती।
उसे खुद पर हैरानी हो रही थी। वह कभी किसी अजनबी को इतनी देर तक नहीं देखता था।
लेकिन मीरा कुछ अलग थी।
कुछ टूटा हुआ… कुछ अधूरा।
वेटर आया।
“मैम, क्या लेंगी आप?”
मीरा ने हल्की आवाज़ में कहा,
“एक कॉफी… बिना चीनी।”
आरव के होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई।
“बिना चीनी… कड़वी कॉफी पसंद करने वाले लोग ज़िंदगी को बहुत गहराई से देखते हैं।”
यह बात वह अपने मन में सोच रहा था, लेकिन अचानक अनजाने में उसके मुँह से निकल गई।
मीरा ने चौंककर उसकी तरफ देखा।
पहली बार उनकी आँखें मिलीं।
कुछ सेकंड के लिए दुनिया थम सी गई।
मीरा की आँखों में हैरानी थी, सवाल था… और थोड़ा सा डर भी।
“सॉरी… मैं बस…”
आरव थोड़ा झेंप गया।
मीरा ने हल्की सी मुस्कान दी।
“कोई बात नहीं… शायद आप सही कह रहे हैं।”
उसकी आवाज़ में एक अजीब सी थकान थी।
आरव ने खुद को संभालते हुए कहा,
“मैं आरव… और आप?”
“मीरा,” उसने धीरे से कहा।
बस एक नाम।
लेकिन उस नाम ने आरव के दिल में कुछ जगा दिया।
कुछ ऐसा, जो वह खुद भी नहीं समझ पाया।
कॉफी आ चुकी थी।
मीरा खिड़की से बाहर देख रही थी। बाहर बारिश की हल्की बूँदें गिरने लगी थीं।
“बारिश पसंद है आपको?” आरव ने पूछा।
मीरा ने बिना उसकी तरफ देखे कहा,
“बारिश सब कुछ धो देती है… लेकिन यादें नहीं।”
आरव चुप हो गया।
यह कोई आम लड़की नहीं थी।
उसके शब्दों में दर्द था।
“आप यहाँ अक्सर आती हैं?” उसने पूछा।
मीरा ने सिर हिलाया।
“नहीं… आज पहली बार।”
“अच्छा लगा आपको यह जगह?”
“हाँ… यहाँ शांति है। मुझे शांति पसंद है।”
आरव ने अपनी डायरी बंद की।
“मैं लेखक हूँ। कहानियाँ लिखता हूँ।”
मीरा ने उसकी तरफ देखा।
“किस तरह की कहानियाँ?”
“अधूरी कहानियाँ… टूटे दिलों की कहानियाँ।”
मीरा के चेहरे पर अजीब सा भाव आ गया।
जैसे उसकी कोई पुरानी चोट फिर से हरी हो गई हो।
कुछ पल खामोशी रही।
फिर मीरा उठ खड़ी हुई।
“मुझे चलना चाहिए।”
आरव ने जल्दी से कहा,
“क्या हम फिर मिल सकते हैं?”
मीरा रुक गई।
धीरे से पलटी।
उसकी आँखों में कुछ चमका।
“कभी-कभी कुछ मुलाकातें बेहतर होती हैं अगर अधूरी ही रह जाएँ।”
और वह चली गई।
दरवाज़े की घंटी फिर बजी।
आरव वहीं बैठा रह गया।
दिल की धड़कन तेज़ थी।
हाथ काँप रहे थे।
उसे एहसास हुआ…
वह किसी अनजान लड़की से नहीं मिला था।
वह अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी कहानी से मिला था।
आरव ने अपनी डायरी खोली और पहली लाइन लिखी:
“आज एक लड़की मिली… जिसकी आँखों में अधूरी मोहब्बत थी।”
उसे नहीं पता था कि यह मोहब्बत उसे कहाँ ले जाएगी।
लेकिन एक बात तय थी…
यह कहानी आसान नहीं होने वाली थी।
क्योंकि कुछ दूर, उसी कैफे के बाहर, बारिश में खड़ा एक साया उन्हें देख रहा था।
और उसकी आँखों में नफ़रत थी।
Episode 1 End
To Be Continued…
