सगाई में तूफान
उस शाम आसमान साफ था…
लेकिन मीरा के दिल में तूफान चल रहा था।
राजवीर सिंह के बंगले को शादी वाले घर की तरह सजाया गया था।
हर तरफ लाइट्स, फूल, बैंड, मेहमान…
और बाहर गार्ड्स की एक पूरी सेना।
मीरा को लाल साड़ी पहनाई गई थी।
उसके माथे पर भारी बिंदी थी।
हाथों में मेहंदी।
और आंखों में… सिर्फ डर।
वो शीशे के सामने खड़ी थी।
अपने ही चेहरे को देख रही थी…
और सोच रही थी—
“ये मैं नहीं हूँ…”
मीरा की आखिरी कोशिश
मीरा ने अपनी मां के पैर पकड़ लिए।
“मां… प्लीज़…”
उसकी आवाज़ कांप रही थी।
“मुझे मत भेजो… मैं खुश नहीं रहूंगी।”
मीरा की मां—शालिनी सिंह—ने उसे ऊपर से नीचे देखा।
फिर धीमे स्वर में कहा—
“मीरा… इस घर में खुश रहने का अधिकार नहीं होता।
यहाँ सिर्फ निभाना होता है।”
मीरा की आंखों से आंसू गिर पड़े।
“लेकिन मां… मैं किसी और से प्यार करती हूँ…”
शालिनी सिंह ने अचानक मीरा के गाल पर जोर से थप्पड़ मारा।
चाँट!
मीरा का चेहरा घूम गया।
शालिनी ने दबी आवाज़ में कहा—
“ये शब्द…
इस घर में कभी मत बोलना।”
विवान मल्होत्रा की एंट्री
हॉल में मेहमान जमा हो चुके थे।
और तभी दरवाज़ा खुला।
विवान मल्होत्रा अंदर आया।
काले रंग का सूट।
चेहरे पर घमंड।
आंखों में वही ठंडक…
जो पैसे और सत्ता वाले लोगों में होती है।
मीरा ने उसे देखा।
और उसका दिल जैसे मर गया।
विवान ने मुस्कुराकर कहा—
“मीरा…
आज से तुम मेरी हो।”
मीरा ने कुछ नहीं कहा।
वो सिर्फ चुप रही।
और उस चुप्पी में…
एक चीख थी।
आरव की तैयारी
उधर दूसरी तरफ…
आरव और नील एक छोटी कार में बैठे थे।
आरव के हाथ में एक पेन-ड्राइव थी।
और उसकी आंखों में सिर्फ एक लक्ष्य—
“मीरा को बचाना।”
नील ने आरव की तरफ देखा।
“भाई… अगर आज पकड़े गए…
तो बचने का कोई रास्ता नहीं होगा।”
आरव ने धीमे स्वर में कहा—
“नील…
आज मैं डर नहीं रहा।”
“आज मैं बस… प्यार कर रहा हूँ।”
नील ने गहरी सांस ली।
“तो चल…
तूफान उठाते हैं।”
बंगले के बाहर
बंगले के बाहर सिक्योरिटी बहुत ज्यादा थी।
हर गार्ड के हाथ में बंदूक।
CCTV।
मेटल डिटेक्टर।
आरव ने एक पल के लिए रुका।
और अपनी जेब से मीरा का दिया हुआ वो छोटा सा कंगन निकाला।
उसने उसे अपने हाथ में कसकर पकड़ा।
“मीरा…”
उसने खुद से कहा,
“आज मैं तुम्हें वापस ले जाऊंगा।”
एंट्री (धमाके की तरह)
आरव और नील ने “कैटरिंग स्टाफ” के कपड़े पहन रखे थे।
नील ने एक ट्रे उठाई।
आरव ने सिर नीचे रखा।
दोनों धीरे-धीरे अंदर घुसे।
गार्ड ने पूछा—
“कहाँ जा रहे हो?”
नील ने तुरंत जवाब दिया—
“सर… वीआईपी टेबल के लिए स्नैक्स।”
गार्ड ने देखा, फिर जाने दिया।
आरव की सांसें तेज थीं।
लेकिन उसकी आंखों में डर नहीं था।
सगाई की रस्म
हॉल के बीच में स्टेज सजा था।
पंडित मंत्र पढ़ रहा था।
विवान रिंग पकड़े खड़ा था।
मीरा… जैसे एक जिंदा लाश।
पंडित बोला—
“अब वर वधू को अंगूठी पहनाए…”
विवान ने रिंग उठाई।
मीरा का हाथ कांप रहा था।
और तभी—
तूफान का पहला झटका
“रुको!”
एक तेज आवाज़ गूंजी।
पूरा हॉल सन्नाटा।
सभी की नजरें दरवाज़े की तरफ गईं।
और वहाँ…
आरव खड़ा था।
भीगे बाल।
आंखों में आग।
और हाथ में पेन-ड्राइव।
मीरा की आंखें फैल गईं।
उसके होंठ कांपने लगे।
“आरव…”
राजवीर सिंह का गुस्सा
राजवीर सिंह कुर्सी से खड़ा हो गया।
उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं…
खून था।
“तुम…”
उसने दहाड़ते हुए कहा,
“यहाँ कैसे आए?”
आरव ने बिना डरे जवाब दिया—
“मीरा को लेने।”
हॉल में हलचल शुरू हो गई।
विवान मल्होत्रा ने आगे बढ़कर कहा—
“ओह… तो यही है वो लड़का?”
विवान ने हंसकर कहा—
“जो मेरी होने वाली पत्नी के पीछे घूमता था।”
मीरा का टूटना
मीरा की आंखों से आंसू निकल आए।
“आरव… तुम चले जाओ…”
मीरा ने कांपकर कहा।
“ये लोग तुम्हें मार देंगे…”
आरव ने मीरा की तरफ देखा।
उसकी आवाज़ नरम हो गई।
“मीरा…
मैं बिना तुम्हारे… जिंदा नहीं रह सकता।”
मीरा ने सिर झुका लिया।
सच का विस्फोट
राजवीर सिंह ने अमन राठौर को इशारा किया।
अमन ने गार्ड्स को बुलाया।
गार्ड्स आरव की तरफ बढ़ने लगे।
नील ने तुरंत चिल्लाकर कहा—
“रुको!”
और उसने टीवी स्क्रीन पर पेन-ड्राइव लगा दी।
स्क्रीन ऑन हुई।
और वीडियो चलने लगा।
वीडियो बयान
स्क्रीन पर इमरान खान दिखाई दिया।
उसकी आवाज़ कांप रही थी, लेकिन शब्द साफ थे—
“राजवीर सिंह ने गरीबों की जमीन छीनी…
और एक बच्चा मरा…
और उसने कहा—
‘ये गरीब हैं, मरेंगे तो क्या?’”
हॉल में सन्नाटा छा गया।
मेहमानों के चेहरे उतर गए।
राजवीर सिंह की आंखें लाल हो गईं।
“बंद करो इसे!”
वो चिल्लाया।
राजवीर सिंह की बेइज्जती
आरव ने ऊंची आवाज़ में कहा—
“ये है आपके पिता की सच्चाई, मीरा!”
“और ये है उस आदमी की सच्चाई…
जो आपको खरीदकर शादी कर रहा है!”
विवान मल्होत्रा का चेहरा तमतमा गया।
“ये सब झूठ है!”
विवान चिल्लाया।
आरव ने कहा—
“झूठ?
तो पुलिस में केस क्यों दबाया गया?
गवाह क्यों गायब किए गए?”
मीरा की पहली आवाज़
मीरा ने पहली बार ऊंची आवाज़ में कहा—
“बस!”
पूरा हॉल चुप हो गया।
मीरा की आंखों से आंसू गिर रहे थे।
“पापा…”
मीरा ने कहा,
“आपने मेरी जिंदगी को सौदा बना दिया…”
राजवीर सिंह ने गुस्से में कहा—
“मीरा!
चुप रहो!”
मीरा ने कांपते हुए कहा—
“नहीं…
अब नहीं।”
अमन का हमला
अमन राठौर ने गार्ड को इशारा किया।
एक गार्ड ने आरव को पीछे से पकड़ लिया।
आरव गिर पड़ा।
मीरा चीख पड़ी।
नील ने गार्ड को धक्का दिया।
हॉल में अफरा-तफरी।
मेहमान भागने लगे।
बैंड वाले भागे।
पंडित ने मंत्र बंद कर दिए।
मीरा का फैसला
मीरा स्टेज से नीचे उतरी।
उसने आरव का हाथ पकड़ा।
और सबके सामने कहा—
“मैं आरव के साथ जाऊंगी।”
राजवीर सिंह की आंखें जल उठीं।
“अगर तुम इस दरवाज़े से बाहर गई…”
राजवीर ने कहा,
“तो तुम मेरी बेटी नहीं रहोगी!”
मीरा ने रोते हुए कहा—
“मैं आपकी बेटी थी, पापा…
पर आपने मुझे इंसान नहीं समझा।”
राजवीर का आखिरी दांव
राजवीर सिंह ने जेब से बंदूक निकाली।
पूरा हॉल चीख पड़ा।
मीरा की सांस रुक गई।
आरव आगे आया।
“गोली मुझे मारिए,”
आरव ने कहा,
“मीरा को छोड़ दीजिए।”
राजवीर ने बंदूक आरव के माथे पर रख दी।
मीरा चीख पड़ी—
“नहीं!”
तूफान की चरम सीमा
तभी बाहर पुलिस सायरन की आवाज़ आई।
नील ने धीरे से कहा—
“आरव… पुलिस आ गई।”
राजवीर सिंह चौंका।
“पुलिस…?”
नील ने कहा—
“हाँ… मैंने लाइव स्ट्रीम कर दिया था।”
राजवीर का चेहरा उतर गया।
भागने का मौका
आरव ने तुरंत मीरा का हाथ पकड़ा।
“भागो!”
दोनों दौड़े।
हॉल के पीछे वाला दरवाज़ा खुला।
गार्ड्स पीछे दौड़े।
अमन चिल्लाया—
“मीरा को मत जाने देना!”
अंतिम दृश्य
आरव और मीरा बाहर निकले।
बारिश शुरू हो गई थी।
दोनों की सांसें तेज थीं।
मीरा रो रही थी।
आरव ने उसे अपने सीने से लगाया।
“अब तुम सुरक्षित हो,”
आरव ने कहा।
मीरा ने कांपते हुए कहा—
“नहीं आरव…
अब असली युद्ध शुरू होगा।”
और उसी पल—
एक गाड़ी तेज रफ्तार में आई।
हेडलाइट्स सीधे आरव और मीरा पर।
आरव ने मीरा को पीछे किया।
और—
धड़ाम!
