अधूरी मोहब्बत Season 1 – Episode 3

प्यार की शुरुआत

मीरा को होश आया तो सबसे पहले उसे दवाइयों की गंध महसूस हुई।

उसने धीरे-धीरे आँखें खोलीं।

सामने सफेद दीवारें थीं, हल्की रोशनी, और पास रखी एक कुर्सी पर कोई बैठा हुआ था।

वह आरव था।

उसका चेहरा थका हुआ था, आँखों में डर और चिंता साफ झलक रही थी।

मीरा ने हल्की आवाज़ में कहा,
“मैं… कहाँ हूँ?”

आरव चौंककर खड़ा हो गया।
“तुम होश में आ गई… शुक्र है।”

“यह जगह…?”

“हॉस्पिटल,” आरव ने कहा। “तुम बेहोश हो गई थीं।”

मीरा ने आँखें बंद कर लीं।

उसके दिमाग़ में वही खून से लिखा हुआ वाक्य घूमने लगा—
‘मीरा, तुम बच नहीं पाओगी।’

उसकी साँस तेज़ हो गई।

आरव ने उसका हाथ थाम लिया।
“घबराओ मत… मैं यहीं हूँ।”

मीरा ने उसकी तरफ देखा।

किसी अजनबी का हाथ पकड़कर उसे पहली बार सुकून मिला था।

कुछ देर बाद डॉक्टर आए। उन्होंने बताया कि मीरा को ज़्यादा सदमा लगा था, लेकिन अब वह ठीक है। पुलिस भी बाहर इंतज़ार कर रही थी।

मीरा डर गई।

“मैं पुलिस से बात नहीं करना चाहती,” उसने काँपते हुए कहा।

आरव ने शांत आवाज़ में कहा,
“अगर तुम नहीं चाहो, तो नहीं करोगी। मैं संभाल लूँगा।”

मीरा ने उसकी आँखों में देखा।

वह आँखें झूठ नहीं बोल रही थीं।

पुलिस से आरव ने बात की। उसने बताया कि किसी ने मीरा के फ्लैट में घुसकर धमकी दी थी। इंस्पेक्टर राज ने केस दर्ज कर लिया, लेकिन उसकी नज़र बार-बार मीरा पर जा रही थी।

जैसे वह कुछ छुपा रही हो।

शाम तक मीरा को डिस्चार्ज मिल गया।

“तुम अकेले नहीं जा सकती,” आरव ने कहा।
“कम से कम आज नहीं।”

मीरा कुछ पल चुप रही।

फिर धीरे से बोली,
“अगर तुम बुरा न मानो… तो क्या मैं तुम्हारे साथ चल सकती हूँ?”

आरव का दिल ज़ोर से धड़क उठा।

“बिल्कुल,” उसने बिना सोचे कहा।

उस रात मीरा पहली बार आरव के घर आई।

छोटा सा फ्लैट था, लेकिन साफ और सादा। दीवारों पर किताबें, एक कोने में पुरानी टाइपराइटर, और खिड़की के पास वही डायरी।

“यह सब तुमने लिखा है?” मीरा ने पूछा।

“ज़्यादातर अधूरी कहानियाँ,” आरव मुस्कुराया।

मीरा ने एक पन्ना पढ़ा।

उसकी आँखें भर आईं।

“तुम दर्द बहुत अच्छे से लिखते हो,” उसने कहा।

आरव ने उसकी तरफ देखा।
“क्योंकि मैंने उसे जिया है।”

खामोशी छा गई।

बाहर बारिश शुरू हो चुकी थी।

मीरा खिड़की के पास खड़ी हो गई।
“पता है… मुझे बारिश से डर लगता है।”

“डर?”

“हाँ… क्योंकि हर बार बारिश के साथ कुछ बुरा हुआ है।”

आरव ने उसके पास जाकर कहा,
“अब कुछ बुरा नहीं होगा।”

मीरा ने उसकी तरफ देखा।

वह पल… कुछ बदल गया।

पहली बार मीरा को लगा कि शायद वह अकेली नहीं है।

दिन बीतने लगे।

मीरा कुछ दिनों के लिए आरव के साथ ही रहने लगी।

सुबह की चाय, देर रात की बातें, अधूरी हँसी, और बीच-बीच में अचानक आ जाने वाली खामोशी।

उन दोनों के बीच कुछ पनपने लगा था।

एक ऐसा रिश्ता, जिसे नाम देने की किसी को हिम्मत नहीं थी।

एक शाम वे छत पर बैठे थे।

शहर की रोशनियाँ दूर तक फैली थीं।

“आरव,” मीरा ने धीरे से कहा,
“अगर मैं तुम्हें सब सच बता दूँ… तो क्या तुम मेरे साथ रहोगे?”

आरव ने बिना सोचे कहा,
“सच चाहे जैसा भी हो।”

मीरा की आँखों में आँसू आ गए।

“मेरे अतीत में एक जुर्म है,” उसने कहा।
“और उस जुर्म की सज़ा मुझे अब मिल रही है।”

आरव कुछ बोल नहीं पाया।

मीरा ने आगे कहा,
“मैं किसी से प्यार नहीं करना चाहती थी… लेकिन तुम…”

उसकी आवाज़ टूट गई।

आरव ने उसका हाथ थाम लिया।
“शायद हम दोनों की कहानियाँ अधूरी हैं… इसलिए मिल गईं।”

मीरा ने उसकी तरफ देखा।

उस पल, बिना कुछ कहे, दोनों के दिल एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए।

लेकिन उसी रात…

आरव के फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।

“उससे दूर रहो… वरना अगली लाश तुम्हारी होगी।”

आरव के चेहरे का रंग उड़ गया।

उसने मीरा की तरफ देखा, जो सो चुकी थी।

उसे एहसास हो गया—

प्यार की शुरुआत हो चुकी थी…

लेकिन खतरा भी अब बहुत पास था।

और यह कहानी अब सिर्फ मोहब्बत की नहीं रही थी।


Episode 3 End

To Be Continued…

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