झूठी रिपोर्ट
अस्पताल की सफेद दीवारें उस रात आरव वर्मा के लिए जेल जैसी लग रही थीं। बाहर बारिश शुरू हो चुकी थी। खिड़की पर पानी की बूंदें गिर रही थीं, और आरव के मन में सिर्फ एक ही आवाज़ गूंज रही थी—
“अगर तुमने फाइल नहीं बंद की, तो अगली लाश तुम्हारी होगी।”
मीरा ICU में थी। डॉक्टर ने कहा था कि वह बच गई है, लेकिन मानसिक रूप से टूट चुकी है।
आरव उसके बेड के पास बैठा था। उसकी आंखें खुलीं, तो उसने बस इतना कहा—
“आरव… वो लोग… बहुत ताकतवर हैं…”
आरव ने उसके हाथ को धीरे से दबाया।
“अब मैं नहीं रुकूंगा, मीरा।”
सुबह की नई मुसीबत
सुबह करीब 6 बजे नील ने घबराया हुआ कॉल किया।
“आरव! तू अभी टीवी ऑन कर!”
आरव ने टीवी चालू किया। स्क्रीन पर ब्रेकिंग न्यूज चल रही थी:
“पत्रकार आरव वर्मा पर गंभीर आरोप, रेलवे कॉलोनी केस में सबूत छेड़छाड़!”
आरव की सांस रुक गई।
एंकर चिल्ला रहा था—
“सूत्रों के मुताबिक पत्रकार आरव वर्मा ने एक महत्वपूर्ण पेन-ड्राइव चोरी कर सबूत नष्ट किए हैं। पुलिस जल्द गिरफ्तारी कर सकती है।”
आरव के हाथ कांप गए।
“ये… ये क्या बकवास है?”
पुलिस का नोटिस
अभी वह खबर समझ ही रहा था कि दरवाज़े पर जोर की दस्तक हुई।
“पुलिस!”
आरव ने दरवाज़ा खोला।
दो पुलिस वाले खड़े थे।
“आरव वर्मा?”
“जी।”
“आपको पूछताछ के लिए थाने चलना होगा। आपके खिलाफ सबूत छेड़छाड़ की शिकायत है।”
आरव हँस पड़ा—
कड़वी हँसी।
“सबूत? कौन सा सबूत? मैंने तो सबूत बचाया है!”
पुलिस वाले ने सख्ती से कहा,
“थाने में आकर बताइए।”
थाने में खेल
थाने में इंस्पेक्टर विक्रम सिंह बैठा था।
उसकी आंखों में वही ठंडापन, वही दबा हुआ घमंड।
“आरव,” विक्रम ने कहा,
“तुम्हें समझाया था ना… ये केस छोड़ दो।”
आरव ने गुस्से में कहा,
“मीरा को मारने की कोशिश हुई! रमेश की हत्या हुई! और आप मुझे केस छोड़ने बोल रहे हैं?”
विक्रम ने फाइल खोली।
“तुम पर आरोप है कि तुमने पुलिस की सीसीटीवी पेन-ड्राइव चुराई और एडिट की।”
आरव चौंक गया।
“क्या? ये झूठ है!”
विक्रम ने टेबल पर एक पेन-ड्राइव रखी।
“ये देखो। ये तुम्हारे घर से मिली है।”
आरव का चेहरा सफेद पड़ गया।
“मेरे घर से? ये कैसे—”
विक्रम ने ठंडी आवाज़ में कहा,
“हमने तलाशी ली।”
झूठा सबूत
आरव ने पेन-ड्राइव लगाकर वीडियो चलाया।
स्क्रीन पर वही फुटेज…
लेकिन अब उसमें एक नया हिस्सा था।
वीडियो में दिख रहा था—
आरव खुद रमेश को पकड़कर गाड़ी में बैठा रहा है।
आरव का दिमाग घूम गया।
“ये नकली है…”
उसकी आवाज़ टूट गई।
नील चिल्लाया,
“ये एडिटेड है! ये कोई भी देख सकता है!”
विक्रम ने कंधे उचका दिए।
“कोर्ट में साबित करना।”
गिरफ्तारी की तैयारी
विक्रम ने सिगरेट जलाई।
“आरव, तुम अभी भी चाहो तो बच सकते हो।”
“कैसे?” आरव ने पूछा।
“बस ये केस छोड़ दो।
और मीरा को भी शहर छोड़ने दो।”
आरव ने विक्रम की आंखों में देखा।
“तुम लोग मीरा से क्या चाहते हो?”
विक्रम ने मुस्कान दबा ली।
“कुछ लोग सच नहीं चाहते, आरव।”
मीरा का बयान
उसी दिन अस्पताल में मीरा की हालत थोड़ी बेहतर हुई।
लेकिन अचानक पुलिस वहाँ भी पहुंच गई।
“हमें बयान चाहिए,” पुलिस ने कहा।
मीरा घबरा गई।
“मैं… मैं कुछ नहीं जानती…”
आरव ने उसे देखा।
मीरा डर के कारण सच बोल ही नहीं पा रही थी।
पुलिस ने बयान लिखा—
“मीरा ने कहा कि आरव उसे जबरदस्ती इस केस में घसीट रहा था।”
आरव सन्न रह गया।
“मीरा, ये क्या…?”
मीरा रो पड़ी।
“उन्होंने कहा… अगर मैंने सच बोला… तो मेरे माता-पिता…”
आरव टूटता नहीं
आरव पहली बार समझा—
ये सिर्फ उसे फंसाने की कोशिश नहीं थी,
ये मीरा को भी तोड़ने की कोशिश थी।
उसने मीरा से कहा,
“डरो मत। मैं सब संभाल लूंगा।”
मीरा ने कांपते हुए कहा,
“आरव… वो लोग हमें खत्म कर देंगे…”
आरव ने धीमी आवाज़ में जवाब दिया,
“तो हम पहले उनका सच खत्म करेंगे।”
एक नया सुराग
रात को कॉन्स्टेबल अमन फिर आया।
चेहरा पसीने से भीगा हुआ।
“सर… आप फंस गए हैं,”
उसने कहा।
“मुझे पता है,” आरव ने कहा।
अमन ने एक कागज़ दिया।
“ये असली रिपोर्ट है।
पोस्टमार्टम की।”
आरव ने कागज़ पढ़ा—
मौत का कारण: दम घुटना (Strangulation)
गले पर रस्सी के निशान
शरीर पर चोट
आरव की आंखें चमक उठीं।
“ये तो…”
अमन ने कहा,
“सर… पुलिस ने ये रिपोर्ट बदल दी।
लेकिन ये कॉपी मैंने बचा ली।”
सच की पहली जीत
आरव ने तुरंत नील को बुलाया।
“हम इसे ऑनलाइन डालेंगे,”
आरव ने कहा।
नील ने डरते हुए पूछा,
“अगर उन्होंने साइट बंद कर दी?”
आरव ने कहा,
“तो हम हर जगह डालेंगे।
फेसबुक, ट्विटर, टेलीग्राम—हर जगह।”
बड़ा हमला
जैसे ही रिपोर्ट ऑनलाइन गई—
आरव का लैपटॉप हैक हो गया।
वेबसाइट डाउन।
फोन में धमकियाँ।
और फिर—
थाने से कॉल आया।
“आरव वर्मा, आप पर अब IT एक्ट और सरकारी दस्तावेज चोरी का केस भी लगेगा।”
आरव हँस पड़ा।
“मतलब… सच बोलना अपराध है।”
एपिसोड का अंत
रात को आरव छत पर खड़ा था।
नीचे शहर चमक रहा था।
नील ने पूछा,
“अब क्या?”
आरव ने धीमे स्वर में कहा—
“अब हम उनके खेल को उनके खिलाफ इस्तेमाल करेंगे।”
उसी समय एक कार नीचे आकर रुकी।
कांच काला था।
एक आदमी बाहर निकला।
हाथ में फाइल थी।
उसने आरव की ओर देखा और कहा—
“अगर तुम सच चाहते हो…
तो कल रात 1 बजे… पुराने कोर्ट के पीछे आना।”
और वह चला गया।
आरव की आंखें सख्त हो गईं।
यह मदद थी… या जाल?
