अधूरी मोहब्बत Season 1 • Episode 5

जुदाई की रात


उस रात हवा में सिर्फ ठंड नहीं थी…
उस रात हवा में जुदाई थी।

मीरा के फोन पर “DAD” लिखा देखकर उसका चेहरा सफेद पड़ गया था।
उसकी उंगलियाँ कांप रही थीं।
और आरव… आरव पहली बार समझ गया था कि ये कहानी सिर्फ प्यार की नहीं, ताकत की भी है।

फोन के दूसरी तरफ आवाज़ आई—

“घर वापस आ जाओ… अभी।”

मीरा की आंखों में आंसू भर आए।
उसने धीरे से कहा—

“पापा… मैं…”

लेकिन सामने से आवाज़ और कठोर हो गई—

“मैंने कहा— अभी!”

और कॉल कट गई।


मीरा की खामोशी

मीरा कुछ सेकंड तक वैसे ही खड़ी रही।
उसके होंठ कांप रहे थे, लेकिन शब्द बाहर नहीं आ रहे थे।

आरव ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा।

“मीरा… क्या हुआ?”
आरव ने पूछा।

मीरा ने आंखें उठाईं।
उसकी आंखों में डर था।
और उस डर के पीछे… एक मजबूरी।

“आरव…”
मीरा की आवाज़ टूट गई।
“मुझे जाना होगा।”

आरव ने जैसे विश्वास ही नहीं किया।
“कहाँ?”

मीरा ने धीरे से कहा—

“घर।”


वो आदमी फिर सामने

वो सूट वाला आदमी—
जो खुद को मीरा के पिता का करीबी बता रहा था—
धीरे-धीरे आगे आया।

उसने मीरा की तरफ देखा और बोला—

“मैडम, गाड़ी तैयार है।
हम निकलें?”

मीरा ने आरव की तरफ देखा।
जैसे उसकी आंखें कह रही हों—

“मुझे बचा लो।”

आरव ने गुस्से में कहा—

“वो कहीं नहीं जाएगी!”

आदमी ने शांत आवाज़ में जवाब दिया—

“सर… ये आपका फैसला नहीं है।
मीरा मैडम का परिवार… बहुत बड़ा है।”

आरव ने कहा—

“तो क्या?
प्यार छोटा होता है क्या?”

आदमी ने हल्की मुस्कान दी।

“प्यार… यहाँ कमजोरी है।”


मीरा का आखिरी अनुरोध

मीरा ने आरव का हाथ पकड़ लिया।
धीरे से, जैसे डरते हुए।

“आरव… प्लीज़…
आज मुझे जाने दो।”

आरव की आंखों में गुस्सा था।
लेकिन उससे ज्यादा… दर्द।

“मीरा, तुम समझ नहीं रही…”
आरव ने कहा,
“अगर तुम गई…
तो वो तुम्हें वापस नहीं आने देंगे।”

मीरा ने रोते हुए कहा—

“मैं जानती हूँ…”

और यही बात सबसे ज्यादा डरावनी थी।


जुदाई का पहला पल

मीरा गाड़ी की तरफ बढ़ी।

आरव वहीं खड़ा था।
जैसे उसके पैरों में ज़मीन नहीं बची।

मीरा ने पीछे मुड़कर देखा।

उसकी आंखों से आंसू गिर रहे थे।
और उसके होंठों पर सिर्फ एक शब्द था—

“सॉरी…”

आरव ने धीमे स्वर में कहा—

“मीरा…
तुम सॉरी मत बोलो।”

“बस वादा करो…
तुम वापस आओगी।”

मीरा ने सिर हिलाया।

लेकिन वो सिर हिलाना…
वादा नहीं था।

वो मजबूरी थी।


गाड़ी चली गई

गाड़ी आगे बढ़ गई।

मीरा की आंखें पीछे रह गईं।
और आरव…
एकदम अकेला।

सड़क पर बारिश फिर शुरू हो गई।
धीमी-धीमी बूंदें।

आरव के चेहरे पर पानी था…
या आंसू—
वो खुद नहीं जानता था।


आरव का टूटना

आरव घर नहीं गया।

वो सीधे उसी चाय वाले स्टॉल पर गया, जहाँ कल मीरा ने पूछा था—

“क्या कुछ रिश्ते अधूरे ही रह जाते हैं?”

आज आरव के पास जवाब था।

हाँ।
कुछ रिश्ते अधूरे रह जाते हैं…

क्योंकि दुनिया उन्हें पूरा नहीं होने देती।

आरव ने चाय नहीं पी।

वो बस बैठा रहा।
और सोचता रहा—

“मीरा किससे डरती है?”
“उसका परिवार कितना ताकतवर है?”
“वो आदमी कौन था?”


एक नई सच्चाई

अचानक आरव के फोन पर एक मैसेज आया।

Unknown Number.

“मीरा को भूल जाओ।
अगर तुमने पीछा किया…
तो तुम्हारा अंत बहुत बुरा होगा।”

आरव की आंखें लाल हो गईं।

उसने तुरंत उसी नंबर पर कॉल किया।

लेकिन नंबर बंद था।


प्यार अब युद्ध है

आरव ने खुद से कहा—

“ठीक है…”

“अगर ये लोग सोचते हैं कि मैं डर जाऊँगा…
तो वो गलत हैं।”

उसने फोन निकाला और नील को कॉल किया।

“नील,”
आरव ने कहा,
“मुझे मदद चाहिए।”

नील ने पूछा—
“क्या हुआ?”

आरव ने कहा—

“मीरा को जबरदस्ती ले गए हैं।”

नील कुछ सेकंड चुप रहा।

फिर बोला—

“आरव… अब ये मामला रोमांस का नहीं रहा।”

आरव ने जवाब दिया—

“मैं भी यही कह रहा हूँ।
अब ये… युद्ध है।”


मीरा के घर की झलक

उधर मीरा की गाड़ी एक बड़े गेट के सामने रुकी।

ऊँची दीवारें।
CCTV कैमरे।
सुरक्षा गार्ड।

मीरा अंदर गई।

और सामने…

एक आदमी बैठा था।
सफेद कुर्ता।
सख्त चेहरा।

मीरा के पिता।

“राजवीर सिंह।”

मीरा की सांस रुक गई।

राजवीर सिंह ने बिना उठे कहा—

“आ गई?”

मीरा ने धीरे से कहा—

“जी, पापा…”


पिता का फैसला

राजवीर सिंह ने मीरा की तरफ देखा।

“तुम्हें पता है…
तुमने क्या किया है?”

मीरा ने सिर झुका लिया।

राजवीर ने कहा—

“तुम एक आम लड़के के साथ घूम रही थी।
सड़कों पर।
लोग देख रहे थे।”

मीरा की आंखों में आंसू थे।

“पापा… मैं…”

राजवीर ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया।

“अब कुछ नहीं।”


मीरा की सजा

राजवीर सिंह ने आदेश दिया—

“मीरा का फोन छीन लो।
उसका बाहर जाना बंद।
और कल से…
उसकी शादी की बात शुरू होगी।”

मीरा चौंक गई।

“शादी…?”
उसने कांपकर कहा।

राजवीर ने ठंडे स्वर में कहा—

“हाँ।
अब तुम्हारी जिंदगी का फैसला मैं करूंगा।”


मीरा की चीख (अंदर ही अंदर)

मीरा रो रही थी।

लेकिन वो रो नहीं सकती थी।

क्योंकि इस घर में आंसुओं की भी इजाजत नहीं थी।

वो अपने कमरे में बंद कर दी गई।

कमरा बड़ा था।
लेकिन वह कमरा…
एक जेल था।

मीरा खिड़की से बाहर देख रही थी।

और बस एक ही नाम उसके होंठों पर था—

“आरव…”


आरव का प्लान

रात के 2 बजे।

आरव और नील एक पुराने दोस्त के ऑफिस में बैठे थे।
वो दोस्त एक प्राइवेट डिटेक्टिव था।

नील ने कहा—

“मीरा के पिता… राजवीर सिंह।
बहुत बड़ा आदमी है।”

डिटेक्टिव ने फाइल खोली।

“राजवीर सिंह,”
वो बोला,
“इस शहर का सबसे बड़ा बिल्डर।
और राजनीति में सीधा हाथ।”

आरव ने पूछा—

“और वो सूट वाला आदमी?”

डिटेक्टिव ने फोटो दिखाया।

“उसका नाम है—
अमन राठौर।
राजवीर का राइट हैंड।
और बहुत खतरनाक।”

आरव ने मुट्ठी भींच ली।


अंतिम सीन: आरव का वादा

आरव अकेले छत पर खड़ा था।
बारिश तेज़ हो चुकी थी।

उसने आसमान की तरफ देखा।

“मीरा…”
उसने धीरे से कहा,
“तुम्हें कोई भी मुझसे अलग नहीं कर सकता।”

“मैं तुम्हें वापस लाऊँगा।”

और उसी पल…

आरव के फोन पर एक और मैसेज आया।

Unknown Number.

“अगर मीरा को वापस लाने की कोशिश की…
तो तुम्हारी लाश भी नहीं मिलेगी।”

आरव ने स्क्रीन बंद की।
और मुस्कुराया।

“अब देखो…”
आरव ने कहा,
“मैं क्या करता हूँ।”


🔚 End of Episode 5

Leave a Comment