अधूरी मोहब्बत
एम्बुलेंस की सायरन की आवाज़ शहर की सड़कों पर गूंज रही थी।
मीरा आरव का हाथ पकड़कर बैठी थी।
उसकी उंगलियाँ बर्फ जैसी ठंडी थीं…
और दिल आग की तरह जल रहा था।
आरव की आंखें बंद थीं।
उसका शरीर खून में लथपथ था।
और मीरा…
उसकी सांसें गिन रही थी।
“आरव…”
मीरा रोते हुए फुसफुसाई,
“प्लीज़… आंखें खोलो…”
लेकिन आरव का शरीर कोई जवाब नहीं दे रहा था।
अस्पताल का डर
एम्बुलेंस अस्पताल के गेट पर रुकी।
डॉक्टर दौड़ते हुए आए।
मीरा ने घबराकर पूछा—
“वो… वो ठीक हो जाएगा ना?”
डॉक्टर ने सिर्फ इतना कहा—
“हम कोशिश करेंगे।”
और आरव को स्ट्रेचर पर लेकर अंदर चले गए।
मीरा पीछे भागी।
लेकिन एक पुलिस वाला बीच में आ गया।
“मैडम… आप अंदर नहीं जा सकतीं।”
मीरा ने चीखकर कहा—
“वो मेरा… मेरा…”
उसके होंठ कांप गए।
वो बोल नहीं पाई—
“वो मेरा प्यार है।”
नील का साथ
नील भी अस्पताल पहुंच चुका था।
उसने मीरा को संभाला।
“मीरा… मजबूत रहो,”
नील ने कहा।
“आरव बहुत स्ट्रॉन्ग है।”
मीरा की आंखों में आंसू थे।
“नील… अगर उसे कुछ हो गया…”
मीरा की आवाज़ टूट गई।
नील ने उसका हाथ पकड़ा।
“कुछ नहीं होगा,”
नील ने कहा।
“और अगर हुआ भी…”
“तो हम राजवीर सिंह को नहीं छोड़ेंगे।”
राजवीर सिंह की चाल
उधर राजवीर सिंह अपने घर में बैठा था।
टीवी पर न्यूज चल रही थी—
“राजवीर सिंह की बेटी मीरा सिंह ने लाइव टीवी पर आरोप लगाए…”
राजवीर सिंह ने रिमोट फेंक दिया।
उसकी आंखों में नफरत थी।
अमन राठौर पुलिस कस्टडी में था।
और अब राजवीर सिंह अकेला नहीं था।
वो घिर चुका था।
लेकिन राजवीर सिंह जैसे आदमी…
हारने के लिए पैदा नहीं होते।
उसने अपने वकील को बुलाया।
“मुझे मीरा चाहिए,”
राजवीर ने कहा।
वकील ने कहा—
“सर… अभी मीडिया…”
राजवीर सिंह ने गुस्से में कहा—
“मीडिया खरीद लो।
पुलिस खरीद लो।
जज खरीद लो।”
फिर उसने धीरे से कहा—
“और आरव…
आरव को मार दो।”
अस्पताल में खतरा
रात 12 बजे।
अस्पताल के कॉरिडोर में सन्नाटा था।
मीरा बाहर बैठी थी।
नील उसके साथ।
तभी एक नर्स आई।
“मीरा मैम…”
नर्स ने धीरे से कहा,
“आप अंदर चलिए… डॉक्टर ने बुलाया है।”
मीरा तुरंत उठी।
नील ने कहा—
“मैं भी चलूं?”
नर्स ने कहा—
“सिर्फ मीरा मैम।”
नील को शक हुआ।
“मीरा… रुको,”
नील ने फुसफुसाकर कहा,
“कुछ गड़बड़ है।”
लेकिन मीरा पहले ही चल चुकी थी।
फर्जी नर्स
मीरा ऑपरेशन थिएटर की तरफ बढ़ी।
रास्ता लंबा था।
और अंधेरा।
मीरा का दिल तेज़ धड़क रहा था।
तभी अचानक—
पीछे से किसी ने उसका मुंह दबा दिया।
मीरा ने चीखने की कोशिश की।
लेकिन आवाज़ नहीं निकली।
उसकी आंखों के सामने वही नर्स थी…
लेकिन अब उसके हाथ में इंजेक्शन था।
मीरा की आंखें फैल गईं।
“शांत रहो…”
नर्स ने कहा।
“ये सब तुम्हारे पापा का ऑर्डर है।”
और अगले ही पल—
इंजेक्शन मीरा की गर्दन में लग गया।
मीरा की आंखें भारी होने लगीं।
उसने गिरते हुए बस इतना कहा—
“आरव…”
और फिर…
सब काला हो गया।
आरव की जिंदगी का आखिरी मोड़
ऑपरेशन थिएटर के बाहर एक आदमी खड़ा था।
चेहरे पर मास्क।
हाथों में ग्लव्स।
वो डॉक्टर नहीं था।
वो राजवीर सिंह का आदमी था।
उसने अंदर जाकर आरव के पास कदम बढ़ाए।
आरव बेहोश था।
मशीनों की बीप-बीप चल रही थी।
आदमी ने धीरे से कहा—
“सॉरी भाई…
प्यार का अंजाम यही होता है।”
उसने आरव के IV में कुछ डालने के लिए सिरिंज उठाई।
नील की एंट्री (हीरो मोमेंट)
तभी दरवाज़ा जोर से खुला।
धड़ाम!
नील अंदर घुसा।
“रुको!!!”
नील चिल्लाया।
आदमी चौंक गया।
नील ने उसे धक्का दिया।
सिरिंज गिर गई।
नील ने तुरंत आरव की मशीन देखी।
और गार्ड्स को बुलाकर चिल्लाया—
“यह आदमी नकली है!
पुलिस बुलाओ!”
अस्पताल में हंगामा मच गया।
आदमी भागने लगा।
लेकिन अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड्स ने उसे पकड़ लिया।
मीरा गायब
नील बाहर निकला।
“मीरा!”
उसने चारों तरफ देखा।
“मीरा कहाँ है?”
उसने रिसेप्शन पर जाकर पूछा।
“मीरा सिंह?”
रिसेप्शनिस्ट ने कहा—
“वो तो डॉक्टर के पास गई थी…”
नील को झटका लगा।
“कौन डॉक्टर?”
रिसेप्शनिस्ट बोली—
“एक नर्स उन्हें ले गई थी…”
नील का चेहरा सफेद पड़ गया।
“ओह शिट…”
मीरा का अपहरण
मीरा की आंख खुली।
वो किसी अंधेरी जगह पर थी।
हाथ बंधे हुए।
मुंह पर टेप।
उसके सामने राजवीर सिंह खड़ा था।
उसकी आंखों में गुस्सा नहीं था।
उसकी आंखों में… मौत थी।
“मीरा…”
राजवीर सिंह ने कहा,
“तुमने मेरी इज्जत मिट्टी में मिला दी।”
मीरा ने आंखों से आंसू गिराए।
राजवीर सिंह ने कहा—
“अब तुम्हारी बारी है…
इस परिवार को बचाने की।”
मीरा का साहस
मीरा ने अपने मुंह का टेप किसी तरह हटाया।
और कांपते हुए कहा—
“पापा…”
“आपने मुझे बेटी नहीं…
सौदा समझा।”
राजवीर सिंह ने गुस्से में कहा—
“मैंने तुम्हें सब दिया!”
मीरा ने रोते हुए कहा—
“आपने मुझे प्यार नहीं दिया।”
आरव का होश
उधर आरव को होश आने लगा।
उसने आंखें खोलीं।
और सबसे पहला शब्द—
“मीरा…”
नील ने उसका हाथ पकड़ा।
“आरव… मीरा को तुम्हारे पापा ने उठा लिया है।”
आरव की आंखों में बिजली दौड़ गई।
“क्या?!!”
आरव उठने की कोशिश करने लगा।
डॉक्टर चिल्लाए—
“आप अभी नहीं उठ सकते!”
लेकिन आरव जैसे दर्द से नहीं…
सिर्फ प्यार से चल रहा था।
फाइनल क्लाइमैक्स
नील ने लोकेशन ट्रैक की।
सरला ने मदद की।
और दोनों उस पुराने फार्महाउस पहुंचे
जहां राजवीर सिंह मीरा को ले गया था।
दरवाज़ा खुला था।
अंदर सन्नाटा।
मीरा जमीन पर बैठी थी।
राजवीर सिंह के हाथ में बंदूक थी।
“एक कदम और…”
राजवीर सिंह ने कहा,
“तो मैं मीरा को मार दूंगा।”
आरव आगे आया।
“पापा…”
आरव ने कहा,
“आपने सब कुछ कर लिया…”
“अब बस मुझे मार दीजिए।
मीरा को छोड़ दीजिए।”
राजवीर सिंह ने गुस्से में कहा—
“तू कौन होता है मुझे बोलने वाला?”
आरव ने कहा—
“मैं वो हूँ…
जो आपकी बेटी को इंसान समझता है।”
मीरा की आखिरी चीख
मीरा रोते हुए बोली—
“पापा… प्लीज़…
बस बहुत हो गया…”
राजवीर सिंह ने बंदूक उठाई।
और तभी—
पीछे से पुलिस की आवाज़ आई।
“राजवीर सिंह!
हथियार नीचे रखो!”
राजवीर सिंह चौंक गया।
नील ने पुलिस को बुला लिया था।
राजवीर का आखिरी फैसला
राजवीर सिंह ने मीरा की तरफ देखा।
और फिर आरव की तरफ।
उसकी आंखों में नफरत थी।
“अगर मीरा मेरी नहीं…”
वो बोला,
“तो किसी की नहीं।”
उसने बंदूक मीरा पर तानी।
मीरा की आंखें बंद हो गईं।
आरव ने बिना सोचे मीरा के सामने छलांग लगाई।
धांय!
गोली चली।
और आरव के सीने में लग गई।
सब कुछ शांत
मीरा की चीख…
“आरव!!!”
आरव जमीन पर गिर पड़ा।
उसकी आंखें खुली थीं।
मीरा उसके पास दौड़ी।
“नहीं… नहीं… नहीं…”
आरव ने धीरे से मीरा का हाथ पकड़ा।
उसके होंठ कांपे।
“मीरा…”
आरव ने कहा,
“अब… तुम आज़ाद हो…”
मीरा रोते हुए बोली—
“मुझे आज़ादी नहीं चाहिए…
मुझे तुम चाहिए…”
आरव की आंखों से एक आंसू निकला।
“मैं… हमेशा…
तुम्हारे साथ… रहूंगा…”
और फिर…
आरव की आंखें धीरे से बंद हो गईं।
राजवीर सिंह गिरफ्तार
पुलिस ने राजवीर सिंह को पकड़ लिया।
उसके हाथ से बंदूक गिर गई।
राजवीर सिंह चिल्लाया—
“मैंने अपनी बेटी के लिए किया!”
मीरा ने रोते हुए कहा—
“नहीं पापा…”
“आपने अपनी इज्जत के लिए किया…”
अंतिम सीन (शॉकिंग ट्विस्ट)
तीन दिन बाद।
आरव का अंतिम संस्कार हो चुका था।
मीरा एक मंदिर के बाहर बैठी थी।
उसके हाथ में आरव का कंगन था।
नील उसके पास आया।
“मीरा…”
नील ने कहा,
“तुम ठीक हो?”
मीरा ने खाली आंखों से कहा—
“मैं जिंदा हूँ…
लेकिन मेरा प्यार मर गया।”
नील ने धीरे से कहा—
“मीरा… एक बात बताऊं?”
मीरा ने पूछा—
“क्या?”
नील ने उसकी तरफ एक फाइल बढ़ाई।
“आरव… मरा नहीं है।”
मीरा की आंखें फैल गईं।
“क्या…?”
नील ने कहा—
“जिस बॉडी का अंतिम संस्कार हुआ…
वो आरव नहीं था।”
मीरा कांपने लगी।
नील ने कहा—
“आरव को किसी ने बचाया…
और उसे गायब कर दिया।”
मीरा की आंखों में पहली बार फिर से उम्मीद जगी।
और उसी पल—
मीरा के फोन पर एक मैसेज आया।
Unknown Number.
“अधूरी मोहब्बत…
अभी खत्म नहीं हुई है।”
मीरा की सांस रुक गई।
उसने स्क्रीन को देखा…
और फिर आसमान की तरफ।
