रात की पहली चीख
कमरे के अंदर हवा अचानक और ठंडी हो गई थी। जैसे किसी ने पूरी हवेली से गर्मी खींचकर बाहर फेंक दी हो। सज्जाद और रेहाना एक-दूसरे को देख रहे थे, लेकिन उनकी आंखों में सिर्फ डर नहीं था… एक ऐसा सवाल था जिसका जवाब दोनों के पास नहीं था—ये सब उनके साथ ही क्यों हो रहा है?
रेहाना का हाथ कांप रहा था। वो दीवार पर खून से लिखे शब्दों को देख रही थी—
“तुम वापस आ गए हो…”
उसके होंठ सूख चुके थे।
“सज्जाद… ये… ये किसने लिखा?”
सज्जाद ने धीरे से अपनी सांस संभाली।
“मैं नहीं जानता… लेकिन जो भी है, वो चाहता है कि हम डरें।”
रेहाना ने घबराकर कहा, “और वो बाहर वाली औरत… वो सच में… भूत है?”
सज्जाद ने जवाब नहीं दिया। क्योंकि पहली बार उसके दिमाग में भी तर्क हार चुका था।
दरवाज़े के बाहर की परछाई
कमरे के दरवाज़े के बाहर से धीमी-धीमी आवाज़ आ रही थी।
जैसे कोई नाखूनों से लकड़ी को खुरच रहा हो।
खर्र… खर्र…
रेहाना ने डरते हुए अपना मुंह हाथों से ढक लिया।
“वो… वो अंदर आ जाएगी…”
सज्जाद ने मोबाइल की फ्लैशलाइट बंद कर दी।
“शांत रहो… अगर वो हमें नहीं देखेगी तो शायद चली जाए।”
रेहाना की आंखों से आंसू निकल आए।
“सज्जाद… ये सब मेरे साथ ही क्यों हो रहा है… मैं यहाँ नहीं आना चाहती थी…”
सज्जाद ने पहली बार नरमी से कहा,
“मैंने गलती की, रेहाना… लेकिन अब हमें साथ रहना होगा।”
पहली चीख
तभी अचानक—
धड़ाम!
दरवाज़ा जोर से हिला।
जैसे किसी ने बाहर से लात मारी हो।
रेहाना चीख पड़ी।
“या अल्लाह!”
सज्जाद ने जल्दी से दरवाज़े पर अपना कंधा टिकाया।
दरवाज़े की लकड़ी कांप रही थी।
और फिर…
सन्नाटा।
कुछ सेकंड तक कुछ नहीं हुआ।
रेहाना ने कांपते हुए पूछा,
“क्या… क्या वो चली गई?”
सज्जाद ने कहा,
“पता नहीं… लेकिन…”
तभी कमरे के अंदर—
पलंग के नीचे से एक आवाज़ आई।
“सज्जाद…”
सज्जाद का शरीर सुन्न हो गया।
उसने धीरे से नीचे देखा।
पलंग के नीचे…
एक छोटी सी बच्ची का हाथ बाहर निकला हुआ था।
रेहाना की सांस रुक गई।
“नहीं… ये… ये क्या है…”
भयानक बच्ची
पलंग के नीचे से एक बच्ची बाहर निकली।
उसके चेहरे पर धूल और खून लगा था।
आंखें पूरी काली…
और होंठों पर एक डरावनी मुस्कान।
उसने धीरे से कहा,
“तुम… वापस आ गए…”
रेहाना पीछे हट गई।
“सज्जाद… ये बच्ची…!”
सज्जाद ने कांपते हुए पूछा,
“तुम कौन हो?”
बच्ची ने सिर झुकाया।
फिर उसने अपनी गर्दन को असंभव तरीके से मोड़ा—
एक सौ अस्सी डिग्री।
रेहाना ने जोर से चीख मारी।
और उसी पल—
हवेली में एक और चीख गूंज गई।
लेकिन वो चीख रेहाना की नहीं थी।
वो किसी तीसरे इंसान की थी।
“आआआआआ!!!”
कोई और भी है!
सज्जाद और रेहाना दोनों चौंक गए।
रेहाना ने डरते हुए कहा,
“ये आवाज़… बाहर से आई…”
सज्जाद ने कहा,
“इसका मतलब… हवेली में कोई और भी है!”
बच्ची अचानक गायब हो गई।
जैसे वो कभी थी ही नहीं।
कमरे की खिड़की अपने आप खुल गई।
तेज हवा अंदर आई।
और खून से लिखा वाक्य धीरे-धीरे मिटने लगा।
रेहाना ने कांपते हुए कहा,
“सज्जाद… हमें नीचे जाना होगा… किसी को मदद चाहिए…”
सज्जाद ने कहा,
“हाँ… लेकिन सावधानी से।”
सीढ़ियों पर मौत की आहट
दोनों कमरे से बाहर निकले।
कॉरिडोर अब पहले से ज्यादा अंधेरा था।
हवा में बदबू बढ़ गई थी—
जैसे किसी चीज़ का सड़ना शुरू हो गया हो।
वे धीरे-धीरे सीढ़ियों की तरफ बढ़े।
सीढ़ियों पर उतरते समय हर कदम पर लकड़ी चीख रही थी।
क्रीक… क्रीक…
नीचे हॉल में पहुंचते ही उन्होंने देखा—
झूमर अब टूटकर फर्श पर पड़ा था।
और हॉल के बीच में…
एक आदमी खड़ा था।
उसने काला कोट पहन रखा था।
उसकी पीठ उनकी तरफ थी।
रेहाना ने राहत की सांस ली।
“अरे… कोई इंसान…”
सज्जाद ने जोर से कहा,
“भाई! आप कौन हैं?”
आदमी धीरे-धीरे मुड़ा।
उसका चेहरा…
चेहरा पूरी तरह जला हुआ था।
और उसकी आंखों से खून बह रहा था।
रेहाना की चीख निकल गई।
पहली मौत
आदमी ने बिना आवाज़ के अपना हाथ उठाया।
और उसी पल—
हॉल के कोने में रखी एक पुरानी कुर्सी अपने आप हवा में उठ गई।
फिर…
धड़ाम!
कुर्सी सीधे रेहाना की तरफ आई।
सज्जाद ने उसे धक्का देकर बचाया।
कुर्सी दीवार से टकराई और टूट गई।
रेहाना कांप रही थी।
“ये… ये सब सच है…”
सज्जाद ने कहा,
“भागो!”
दोनों भागकर मुख्य दरवाज़े की तरफ गए।
लेकिन दरवाज़ा फिर भी नहीं खुला।
सज्जाद ने खिड़की की तरफ देखा।
वो भी अब जैसे बंद हो चुकी थी।
तभी पीछे से किसी ने रेहाना के बाल पकड़ लिए।
रेहाना ने चीख मारी।
सज्जाद ने मुड़कर देखा—
वो सफेद साड़ी वाली औरत…
रेहाना के पीछे खड़ी थी।
उसके चेहरे पर अब चेहरा नहीं था।
सिर्फ एक काला गड्ढा।
रेहाना पर हमला
रेहाना का शरीर हवा में उठ गया।
उसके पैर जमीन से ऊपर हो गए।
सज्जाद ने चीखकर कहा,
“छोड़ दो उसे!”
उसने पास में पड़ा लोहे का पाइप उठाया और उस परछाई पर मारा।
लेकिन पाइप हवा में से गुजर गया।
जैसे वो कोई इंसान नहीं… धुआं थी।
रेहाना की आंखें पलटने लगीं।
उसकी सांस रुक रही थी।
और फिर…
हॉल के अंदर पहली बार किसी की मौत हुई।
एक जोरदार आवाज़ आई।
चटाक!
रेहाना के पीछे लगी एक पुरानी तस्वीर टूटकर गिर गई।
और उसी टूटे हुए कांच का एक टुकड़ा…
रेहाना के गले पर लग गया।
खून बहने लगा।
रेहाना जमीन पर गिर गई।
सज्जाद चीख उठा।
“रेहाना!!!”
रेहाना की आखिरी सांस
सज्जाद घुटनों के बल बैठ गया।
उसने रेहाना को गोद में उठा लिया।
रेहाना की आंखें खुली थीं।
वो कांपते हुए बोली—
“सज्जाद… ये हवेली… हमें… नहीं छोड़ेगी…”
सज्जाद रोते हुए बोला,
“नहीं! तुम नहीं मरोगी… मैं तुम्हें बाहर ले जाऊंगा…”
रेहाना ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा।
उसकी उंगलियाँ ठंडी हो रही थीं।
“सज्जाद…”
उसने कहा,
“उस फोटो में… तुम जैसा आदमी… वो…”
उसकी सांस टूटने लगी।
“वो… तुम्हारा… पिछला… जन्म…”
और फिर…
रेहाना की आंखें स्थिर हो गईं।
उसकी सांस रुक गई।
सज्जाद का दिल जैसे टूट गया।
“रेहाना… नहीं… नहीं…”
सज्जाद का बदला
सज्जाद ने रेहाना को धीरे से नीचे रखा।
उसकी आंखों में अब सिर्फ डर नहीं था।
अब गुस्सा था।
अब नफरत थी।
अब बदला था।
उसने खड़े होकर हवेली को देखा।
“ठीक है…”
उसने कहा,
“अगर ये खेल है… तो मैं भी खेलूंगा।”
तभी हवा में फिर से वही फुसफुसाहट आई—
“तुम्हारी मोहब्बत… अधूरी थी…”
सज्जाद चौंक गया।
“क्या?”
हवा ने फिर कहा—
“तुमने उसे मारा था…”
सज्जाद का शरीर कांप गया।
“मैंने… किसे?”
Episode 2 का बड़ा Twist
तभी सज्जाद को याद आया—
वो फोटो…
वो आदमी…
उसके जैसा चेहरा…
और सफेद साड़ी वाली औरत…
क्या वो रेहाना थी?
या कोई और?
सज्जाद ने दीवार पर लगे टूटे हुए शीशे में खुद को देखा।
और उसके पीछे…
वो जली हुई आंखों वाला आदमी खड़ा था।
सज्जाद ने मुड़कर देखा।
कोई नहीं था।
लेकिन शीशे में उसका प्रतिबिंब अब भी था।
और शीशे पर खून से लिखा हुआ एक नया वाक्य उभरने लगा—
“अब तुम्हारी बारी है…”
