भूतिया हवेली Season 1 • Episode 3

बंद कमरा


हवेली के हॉल में सन्नाटा था।
इतना गहरा कि सज्जाद को अपनी सांसों की आवाज़ भी भारी लग रही थी।
रेहाना का शरीर उसके सामने पड़ा था।
उसकी आंखें खुली थीं… लेकिन अब उनमें जिंदगी नहीं थी।

सज्जाद की आंखों से आंसू लगातार गिर रहे थे।
वो बार-बार रेहाना का नाम ले रहा था, जैसे उसकी आवाज़ से वो वापस उठ जाएगी।

“रेहाना… प्लीज़… उठ जाओ…”
उसने कांपते हुए कहा।

लेकिन जवाब में सिर्फ हवेली की ठंडी हवा थी।
और दीवारों पर दौड़ती परछाइयाँ।

सज्जाद का दिल अंदर से टूट चुका था।
लेकिन उसी टूटे दिल में एक और चीज़ जन्म ले रही थी—
गुस्सा। बदला। और सच जानने की जिद।

उसने रेहाना के चेहरे की तरफ देखा।
उसकी गर्दन पर खून का निशान था।
और उसके हाथ की उंगलियों में कुछ दबा हुआ था।

सज्जाद ने धीरे से रेहाना का हाथ खोला।

उसकी हथेली में…
एक छोटी सी चाबी थी।

पुरानी, जंग लगी, लेकिन बहुत खास।

सज्जाद की आंखें फैल गईं।
“ये… ये चाबी कहाँ से आई?”

उसने चारों तरफ देखा।
हवेली में कोई नहीं था।
लेकिन उसे लगा जैसे कोई उसे देख रहा हो।


बंद कमरा कहाँ है?

सज्जाद ने चाबी को अपनी जेब में रखा।
उसने रेहाना के शरीर को वहीं छोड़ने की हिम्मत नहीं की, लेकिन वो जानता था—
अभी उसके पास रोने का समय नहीं है।

वो धीरे-धीरे उठकर सीढ़ियों की तरफ बढ़ा।

हवेली के अंदर अब हर चीज़ बदल चुकी थी।
जो कमरे पहले खुले थे, वो अब बंद थे।
जो रास्ते पहले सीधे थे, वो अब लंबे लग रहे थे।

जैसे हवेली…
सज्जाद के साथ खेल रही हो।

सीढ़ियों पर चढ़ते हुए उसे हर कदम पर रेहाना की आवाज़ याद आ रही थी।

“सज्जाद… यहाँ मत आओ…”

“सज्जाद… ये जगह ठीक नहीं…”

और फिर…
उसकी आखिरी सांस।

सज्जाद ने आंखें बंद कर लीं।
“मैं तुम्हें इंसाफ दिलाऊंगा, रेहाना…”


ऊपर की मंज़िल पर अजीब बदलाव

ऊपर की मंज़िल पर पहुंचते ही सज्जाद रुक गया।
कल रात जिस कमरे में वो और रेहाना छुपे थे…
वो कमरा अब वहाँ था ही नहीं।

उसकी जगह एक दीवार थी।
सादा दीवार… जैसे वो कमरा कभी था ही नहीं।

सज्जाद का सिर घूम गया।
“ये… ये कैसे हो सकता है?”

वो दीवार पर हाथ लगाने लगा।
लेकिन दीवार ठोस थी।

तभी पीछे से धीमी आवाज़ आई—

“बंद कमरा…”

सज्जाद चौंक गया।
वो मुड़ा, लेकिन कोई नहीं था।

आवाज़ फिर आई—

“जिसमें सच बंद है…”

सज्जाद ने गुस्से में कहा,
“कौन है?! सामने आ!”

हवा में ठंडी हंसी गूंजी।

“हाहाहाहा…”

और फिर कॉरिडोर के आखिरी कोने में एक दरवाज़ा अपने आप दिखाई देने लगा।
जैसे अंधेरे से बाहर निकलकर आया हो।

दरवाज़ा पुराना था।
उस पर मोटी लोहे की जंजीरें थीं।
और उस पर लिखा था—

“कमरा नंबर 13”


कमरा नंबर 13

सज्जाद का दिल तेजी से धड़कने लगा।
उसने धीरे-धीरे कदम बढ़ाए।

दरवाज़े के पास पहुंचते ही उसे बदबू आने लगी।
सड़न की बदबू।

जैसे कोई चीज़ अंदर बहुत समय से बंद पड़ी हो।

उसने दरवाज़े पर लगी जंजीर को देखा।
उसके बीच में एक ताला था।

सज्जाद ने जेब से वो जंग लगी चाबी निकाली।

उसके हाथ कांप रहे थे।

“अगर ये वही चाबी है…”
उसने खुद से कहा।

उसने चाबी ताले में डाली।

और—

क्लिक…

ताला खुल गया।

सज्जाद का शरीर सुन्न हो गया।


दरवाज़ा खुलते ही…

सज्जाद ने जंजीर हटाई और धीरे से दरवाज़ा खोला।

क्रीईई…

दरवाज़े की आवाज़ इतनी डरावनी थी, जैसे हवेली खुद चीख रही हो।

अंदर अंधेरा था।
लेकिन जैसे ही उसने मोबाइल की फ्लैशलाइट ऑन की—

उसने जो देखा…
वो उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा झटका था।

कमरे के अंदर दीवारों पर लाशों की तस्वीरें लगी थीं।
पुरानी… नई… हर उम्र के लोग।

और हर तस्वीर के नीचे एक नाम लिखा था।

कुछ नाम मिट चुके थे।
कुछ नाम साफ थे।

और उनमें एक नाम…
सज्जाद ने पढ़ा—

“रेहाना”

सज्जाद की सांस रुक गई।
“नहीं…”

वो पीछे हटने लगा।

लेकिन फिर उसकी नजर एक और नाम पर गई—

“सज्जाद”

सज्जाद कांप गया।

“मेरा नाम…?”

उसने दीवार पर अपना नाम देखा।
और उसके नीचे लिखा था—

“अगला”


कमरे के बीच में पुरानी डायरी

कमरे के बीच में एक टेबल थी।
और उस पर एक पुरानी डायरी रखी थी।

डायरी का कवर जला हुआ था।
लेकिन अंदर के पन्ने सुरक्षित थे।

सज्जाद ने डायरी उठाई।

पहला पन्ना खुलते ही उस पर लिखा था—

“हवेली की सच्चाई”

सज्जाद ने पन्ने पढ़ने शुरू किए।


डायरी का रहस्य (Big Reveal)

डायरी में लिखा था—

“इस हवेली में 40 साल पहले एक लड़की रहती थी।
उसका नाम था… रेहाना बेगम
वो इस हवेली के मालिक की बेटी थी।
लेकिन उसकी शादी जबरदस्ती एक अमीर आदमी से कराई जा रही थी।”

सज्जाद का दिल धड़कने लगा।
“रेहाना बेगम…?”

डायरी आगे लिखती थी—

“रेहाना बेगम का प्यार एक नौकर से था।
उस नौकर का नाम था… सज्जाद।”

सज्जाद की आंखें फैल गईं।

“ये… ये क्या बकवास है…”

लेकिन डायरी के अगले पन्ने ने उसकी रूह हिला दी।

“जिस रात रेहाना ने भागने की कोशिश की,
सज्जाद ने उसे बचाने के लिए हवेली के तहखाने में छुपाया।
लेकिन हवेली के मालिक ने दोनों को पकड़ लिया।”

“मालिक ने नौकर सज्जाद को पैसे दिए और कहा—
‘अगर तू रेहाना को छोड़ देगा, तो तेरी जिंदगी बच जाएगी।’”

“लेकिन सज्जाद कमजोर पड़ गया।
उसने रेहाना को धोखा दे दिया।
और हवेली के मालिक ने रेहाना को उसी बंद कमरे में जिंदा दफना दिया।”

सज्जाद की आंखों से आंसू निकल आए।

“नहीं… नहीं… मैं ऐसा नहीं कर सकता…”

डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था—

“रेहाना की आत्मा ने कसम खाई—
‘हर जन्म में मैं सज्जाद को ढूंढूंगी…
और उसे वही दर्द दूंगी…
जो उसने मुझे दिया था।’”

सज्जाद के हाथ से डायरी गिर गई।


कमरे में अचानक हलचल

तभी कमरे के अंदर ठंडी हवा तेज़ हो गई।

मोबाइल की फ्लैशलाइट ब्लिंक करने लगी।

टिक… टिक… टिक…

और फिर—

कमरे की दीवार पर लगे सारे फोटो अपने आप गिरने लगे।

धड़ाम! धड़ाम! धड़ाम!

सज्जाद डरकर पीछे हट गया।

तभी कमरे के कोने से वही सफेद साड़ी वाली औरत सामने आई।

अब उसका चेहरा साफ था।

वो रेहाना थी।

लेकिन… वो रेहाना नहीं थी।

उसकी आंखें पूरी काली थीं।
और चेहरे पर खून के निशान थे।

उसने धीमे स्वर में कहा—

“तुमने मुझे फिर से मारा…”

सज्जाद कांपते हुए बोला—

“मैं… मैं नहीं जानता था… मैं…”

आत्मा ने कहा—

“हर जन्म में तुम भूल जाते हो…”
“और मैं… याद रखती हूँ।”


सज्जाद की चीख

सज्जाद ने पीछे हटते हुए कहा—

“मैंने तुम्हें धोखा नहीं दिया… मैं तुम्हें बचाना चाहता था…”

आत्मा ने हंसते हुए कहा—

“तो फिर रेहाना क्यों मरी?”

सज्जाद की आंखें भर आईं।

“मैं… मैं उसे बचा नहीं पाया…”

आत्मा ने धीरे-धीरे अपना हाथ उठाया।

और कमरे के अंदर रखी एक पुरानी रस्सी हवा में उठने लगी।

वो रस्सी सज्जाद की गर्दन की तरफ बढ़ी।

सज्जाद ने चीखकर कहा—

“रुको! प्लीज़!”


एक नया किरदार (Twist Entry)

तभी अचानक—

धड़ाम!

कमरे की दूसरी दीवार टूट गई।

धूल उड़ी।

और उस धूल के बीच से एक आदमी अंदर आया।

उसके हाथ में लाल रंग का ताबीज़ था।

उसने जोर से कहा—

“हट जा, आत्मा!”

आत्मा पीछे हट गई।

सज्जाद चौंक गया।
“तुम… तुम कौन हो?”

आदमी ने सज्जाद को देखा और कहा—

“मैं इमरान हूँ… और मैं तुम्हें मरने नहीं दूंगा।”

सज्जाद हक्का-बक्का रह गया।

इमरान ने कहा—

“तुम इस हवेली के पहले नहीं…
दसवें शिकार हो।”


Episode 3 का धमाकेदार अंत

इमरान ने सज्जाद का हाथ पकड़ा।

“अगर जिंदा रहना है तो मेरे साथ चलो!”

सज्जाद ने पीछे देखा।

आत्मा दरवाज़े के पास खड़ी थी।
उसकी आंखें लाल हो चुकी थीं।

उसने धीरे से कहा—

“अब भागने से कोई फायदा नहीं…”
“ये हवेली… तुम्हें छोड़ने वाली नहीं।”

और तभी कमरे के अंदर दीवार पर खून से लिखा हुआ एक नया वाक्य उभरा—

“अब शुरू होगा असली खेल…”


🔚 Episode 3 समाप्त

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