रहस्यमयी लड़की
उस रात आरव देर तक सो नहीं पाया।
मीरा का चेहरा बार-बार उसकी आँखों के सामने आ रहा था। उसकी उदास आँखें, उसकी धीमी आवाज़, उसके शब्दों में छुपा दर्द… सब कुछ किसी अधूरी कहानी की तरह उसके दिल में गूंज रहा था।
आरव अपनी डायरी लेकर बालकनी में बैठ गया। हल्की ठंडी हवा चल रही थी और शहर की सड़कों पर गाड़ियों की आवाज़ें आ रही थीं।
उसने लिखा—
“कुछ लोग ज़िंदगी में यूँ आते हैं जैसे कोई भूली हुई याद वापस आ जाए… मीरा भी कुछ ऐसी ही है।”
लेकिन सवाल यह था कि मीरा कौन थी?
और वह इतनी उदास क्यों थी?
सुबह होते ही आरव उसी कैफे में पहुँच गया। उसे नहीं पता था कि वह मीरा को वहाँ पाएगा या नहीं, लेकिन दिल कह रहा था कि शायद किस्मत फिर मौका दे दे।
वह खिड़की वाली मेज पर बैठा।
कॉफी ऑर्डर की।
और हर आने-जाने वाले चेहरे को ध्यान से देखने लगा।
एक घंटा बीत गया।
फिर दो घंटे।
लेकिन मीरा नहीं आई।
आरव निराश होकर उठने ही वाला था कि कैफे का दरवाज़ा खुला।
वही घंटी।
वही खुशबू।
और वही लड़की।
मीरा।
आज उसने हल्के गुलाबी रंग का कुर्ता पहना था। बाल खुले थे। आँखों के नीचे हल्के काले घेरे थे, जैसे उसने भी पूरी रात सोने में गुज़ारी हो।
आरव का दिल तेज़ धड़कने लगा।
मीरा ने उसे देखा।
एक पल को रुकी।
फिर अनजान बनने की कोशिश करते हुए दूसरी मेज पर बैठ गई।
आरव खुद को रोक नहीं पाया।
वह उठकर उसकी तरफ गया।
“आपने कहा था कि कुछ मुलाकातें अधूरी रहनी चाहिए… लेकिन शायद यह वाली पूरी होना चाहती थी।”
मीरा ने उसकी तरफ देखा।
“आप फिर से?”
“हाँ… क्योंकि कल से मैं आपकी कहानी जानना चाहता हूँ।”
मीरा हल्की सी मुस्कुराई।
“मेरी कहानी सुनकर आप डर जाएँगे।”
“मैं कहानियों से नहीं डरता।”
मीरा कुछ पल चुप रही।
फिर बोली,
“तो बैठिए।”
वे दोनों आमने-सामने बैठे।
कॉफी आई।
लेकिन इस बार मीरा ने बिना चीनी वाली कॉफी नहीं मंगवाई।
“आज मीठी क्यों?” आरव ने पूछा।
मीरा ने हल्की उदासी से कहा,
“क्योंकि कल बहुत कड़वा था।”
आरव ने महसूस किया कि उसके हाथ काँप रहे थे।
“आप कहीं काम करती हैं?” उसने पूछा।
“नहीं… अभी बस भाग रही हूँ।”
“किससे?”
मीरा ने उसकी आँखों में देखा।
“अपने अतीत से।”
आरव को लगा जैसे उसकी कहानी किसी खौफनाक राज़ से जुड़ी है।
मीरा उठ खड़ी हुई।
“मुझे जाना होगा।”
“मैं छोड़ देता हूँ।”
“नहीं… मैं अकेले जाना चाहती हूँ।”
मीरा कैफे से बाहर निकली।
आरव कुछ पल खड़ा रहा।
फिर एक फैसला किया।
वह मीरा के पीछे चल पड़ा।
मीरा तेज़ कदमों से चल रही थी।
बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी।
जैसे उसे डर हो कि कोई उसका पीछा कर रहा है।
आरव दूरी बनाए रखते हुए उसके पीछे चलता रहा।
मीरा एक पुरानी कॉलोनी में पहुँची।
तंग गलियाँ।
पुरानी इमारतें।
टूटे हुए स्ट्रीट लाइट।
वह एक जर्जर सी इमारत के अंदर गई।
आरव भी उसके पीछे गया।
सीढ़ियाँ अँधेरे में डूबी हुई थीं।
हर कदम पर अजीब सी खामोशी थी।
मीरा तीसरी मंज़िल पर रुकी।
एक फ्लैट के दरवाज़े के सामने।
दरवाज़े पर लिखा था—
“फ्लैट नंबर 303”
मीरा ने चाबी निकाली।
लेकिन जैसे ही दरवाज़ा खोलने लगी, वह अचानक रुक गई।
धीरे से दरवाज़ा धक्का दिया।
दरवाज़ा खुला हुआ था।
मीरा के चेहरे का रंग उड़ गया।
“मैंने तो ताला लगाया था…” उसने बुदबुदाया।
आरव छुपकर सब देख रहा था।
मीरा डरते-डरते अंदर गई।
आरव भी पीछे-पीछे घुस गया।
कमरे में अजीब सी बदबू थी।
जैसे खून की।
मीरा लाइट जलाने गई।
लाइट जलते ही उसकी चीख निकल गई।
कमरे के बीचों-बीच ज़मीन पर खून फैला हुआ था।
और दीवार पर खून से लिखा था—
“मीरा, तुम बच नहीं पाओगी।”
मीरा काँपने लगी।
“यह… यह कौन कर सकता है?”
तभी पीछे से किसी ने उसका मुँह दबा दिया।
आरव दौड़कर आगे बढ़ा।
“मीरा!”
लेकिन उससे पहले ही किसी ने उसे पीछे से धक्का दे दिया।
अँधेरा।
अफरा-तफरी।
और फिर एक साया खिड़की से कूदकर भाग गया।
मीरा बेहोश होकर ज़मीन पर गिर गई।
आरव ने उसे उठाया।
उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
अब उसे यकीन हो चुका था—
मीरा सिर्फ एक रहस्यमयी लड़की नहीं थी।
वह किसी खतरनाक खेल का हिस्सा थी।
और अब वह खुद भी उस खेल में फँस चुका था।
आरव ने पुलिस को फोन किया।
और पहली बार मीरा का नाम एक क्राइम केस में दर्ज हुआ।
Episode 2 End
To Be Continued…
